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Kiran Bedi

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Kiran Bedi

By: Swati Gautam
Narrated by: Nandkishore Panday
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Summary

हर 26 जनवरी से पहले राजपथ जानेवाली सड़क अपने भव्य आलीशान दृश्य से जगमगा उठती है। हर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर वह ऐसे ही सजी होती है। वर्ष 1975 की 26 जनवरी को भी ऐसा ही हुआ। मार्च अतीत में पहली बार पुरस्कृत दस्ते के आगे एक महिला पुलिस अधिकारी चल रही थी। उस महिला अधिकारी को देखकर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उससे प्रभावित हुईं। महिला के बारे में उन्होंने जानकारी ली और सुबह के नाश्ते के लिए उन्हें आमंत्रित किया। वह कोई और नहीं, किरण बेदी थीं, जिनकी पहली नियुक्ति चाणक्यपुरी में हुई थी सब डिवीजनल अधिकारी के रूप में। आखिरी समय में उन्हें पता चला कि उन्हें परेड के नेतृत्व से निकाल दिया गया है तो उन्होंने अपने महानिरीक्षक से पूछा कि, "सर, मुझे बताया गया है कि परेड का नेतृत्व मैं नहीं करूँगी?" उन्होंने कहा कि, "देखो किरण, 15 किलोमीटर तक मार्च करना है और तुम्हें इतना लंबा रास्ता भारी तलवार थामकर करना होगा। तुम कर पाओगी?" उनके दूसरे सवाल ने महानिदेशक को ही निरुत्तर कर दिया, "सर, इतने गहन परीक्षण के बाद भी मुझे इस प्रश्न का उत्तर देना पड़ेगा?"©2021 Storyside IN (P)2021 Storyside IN Literary History & Criticism
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