Mahakrantikari : Mangal Pandey cover art

Mahakrantikari : Mangal Pandey

Preview
LIMITED TIME OFFER

3 Months Free + £10 Audible voucher

£5.99/mo after 3 months. Cancel monthly.
Get this deal
Offer ends on 5 July 2026 at 11:59 BST.
More purchase options

Mahakrantikari : Mangal Pandey

By: Dinkar Kumar
Narrated by: Vishal Singh
Get this deal

£5.99/mo after 3 months. Offer ends on 5 July 2026 at 11:59 BST. Cancel monthly.

Buy Now for £11.72

Buy Now for £11.72

कलकत्ता के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की पैदल सेना के सिपाही नंबर 1446 का नाम मंगल पांडे। भारत के पहले स्वातंत्र्य समर की ज्वाला सन् 1857 में उन्हीं के प्रयासों से धधकी। दरअसल 20 मार्च, 1857 को सैनिकों को नए प्रकार के कारतूस दिए गए। उन कारतूसों को मुझेहाँह में दाँतों से दबाकर खोला जाता था। वे गाय और सूअर की चरबी से चिकने किए गए थे, ताकि हिंदू और मुसलिम सैनिक धर्म के प्रति अनुराग छोड़कर धर्मविमुख हों। 29 मार्च को मंगल पांडे ने कारतूसों को मुझेहाँह से खोलने की उच्चाधिकारियों की आज्ञा मानने से इनकार कर दिया। सेना ने भी उनका साथ दिया। लेकिन ब्रिटिश उच्चाधिकारियों ने छलबलपूर्वक उन्हें बंदी बना लिया और आठ दिन बाद ही 8 अप्रैल, 1857 को उन्हें फाँसी दे दी। उनकी फाँसी की खबर ने देश भर में चिनगारी का काम किया और मेरठ छावनी से निकला विप्लव पूरे उत्तर भारत में फैल गया, जो स्वातंत्र्य समर के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ। इसने मंगल पांडे का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया। भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के एक प्रमुख हस्ताक्षर की प्रेरणाप्रद जीवनगाथा, जो अन्याय और दमन के प्रतिकार का मार्ग प्रशस्त करती है।©2021 Storyside IN (P)2021 Storyside IN Asia Historical India Military South Asia
adbl_web_anon_alc_button_suppression_t1
No reviews yet