Secrets of the Millionaire Mind (Hindi Edition)
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Narrated by:
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Prateek Dutt Sharma
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By:
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T. Harv Eker
Summary
क्या आपको कभी इस बात पर हैरानी हुर्इ है कि कुछ लोग आसानी से अमीर क्यों बन जाते हैं, जबकि बाक़ी लोग ज़िंदगी भर आर्थिक मुश्किलों में फँसे रहते हैं? क्या यह अंतर उनकी शिक्षा, बुद्धि, योग्यताओं, टाइमिंग, काम की आदतों, संपर्कों, क़िस्मत या नौकरी, बिज़नेस अथवा निवेश के चुनाव के कारण होता है? अचंभित कर देने वाला जवाब है : इनमें से किसी कारण नहीं! अपनी ज़बर्दस्त पुस्तक सीक्रेट्स ऑफ़ द मिलियनेअर माइंड में टी. हार्व एकर यह दावा करते हैं कि “पाँच मिनट में मैं बता सकता हूँ कि भविष्य में आपके पास कितनी दौलत होगी!” एकर आपके “धन और सफलता के ब्लूप्रिटं” को पहचानकर यह काम करते हैं। हम सभी के अवचेतन मन में धन का व्यक्तिगत ब्लूप्रिटं होता है और हमारे वित्तीय जीवन पर सबसे ज़्यादा प्रभाव इसी का पड़ता है। आप मार्केटिंग, सेल्स, सौदेबाज़ी, शेयर बाज़ार, रियल एस्टेट और वित्त की दुनिया के बारे में चाहे सब कुछ जानते हों, लेकिन अगर आपका धन का ब्लूप्रिटं सफलता के उच्च स्तर के लिए निर्धारित नहीं है, तो आपके पास कभी ज़्यादा पैसा नहीं रहेगा - और अगर किसी कारण रहा भी, तो शायद आप उसे जल्दी ही गँवा देंगे! अच्छी ख़बर यह है कि अब आप स्वाभाविक और सहज सफलता उत्पन्न करने के लिए अपने धन के ब्लूप्रिटं को दोबारा निर्धारित कर सकते हैं। सीक्रेट्स ऑफ़ द मिलियनेअर माइंड में दरअसल एक नहीं, दो पुस्तकें हैं। पहला खंड यह स्पष्ट करता है कि आपके धन का ब्लूप्रिटं कैसे काम करता है। टी. हार्व एकर की बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह, हास्य और भावनात्मक प्रबलता के असाधारण तालमेल से आप सीखेंगे कि आपके बचपन के प्रभावों ने आपकी आर्थिक तक़दीर को किस तरह तय किया है। आप यह भी सीखेंगे कि अपने ख़ुद के धन के ब्लूप्रिटं को कैसे पहचानना है और इसे कैसे “बदलना” है, ताकि आप न सिर्फ़ सफलता पा सकें, बल्कि इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण, इसे क़ायम रख सकें और लगातार इसका विस्तार कर सकें। खंड दो में आपका परिचय दौलत की सत्रह फ़ाइलों से होगा, जो विस्तार से बताती है कि अमीर लोग ज़्यादातर ग़रीब और मध्य वर्गीय लोगों से किस तरह अलग सोचते और काम करते हैं।
Please note: This audiobook is in Hindi.
PLEASE NOTE: When you purchase this title, the accompanying PDF will be available in your Audible Library along with the audio.
©2005 Harv Eker (P)2019 Manjul Publishing House