Tibet Mein Saath Varsh [The Seven Years in Tibet]
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Narrated by:
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Vijayan Menon
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By:
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Heinrich Harrer
यूरोप में जिन दिनों द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था, उसी दौरान हाइनरिक हैरर हिमालय की चढ़ाई कर रहे थे। वह एक जाने-माने पर्वतारोही और ओलंपिक स्की चैंपियन भी थे। वह ऑस्ट्रियाई नागरिक थे जिन्हें भारत में अंग्रेज़ों ने क़ैद कर लिया था। लगभग अति-मानवीय प्रयासों के बल पर वह नज़रबंदी शिविर से बच निकलने में सफल रहे और तिब्बत के निषिद्ध शहर ल्हासा में पहुंच गए। इस पवित्र स्थल के दर्शन करने वाले वह पहले पश्चिमी व्यक्ति थे। सात साल तक हैरर ने यहां की भाषा सीखी और तिब्बतियों के बारे में इतनी समझ हासिल कर ली जितनी किसी पश्चिमी व्यक्ति ने पहले कभी नहीं की थी। वह युवा दलाई लामा के दोस्त और शिक्षक बन गए और जब दलाई लामा, लाल चीनी आक्रमण से बचकर भारत आए तो हैरर भी उनके साथ आ गए। यात्रा-वृत्तांत लेखन विधा में यह पुस्तक एक मील का पत्थर है। यह एक रहस्यमय और शानदार संस्कृति की पृष्ठभूमि में अविश्वसनीय साहस और आत्म- निर्भरता की एक अद्भुत कहानी है।
Please note: This audiobook is in Hindi.
©1952 Heinrich Harrer (P)2026 Audible Singapore Private Limited