Friend like Vishal is Blessing
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About this listen
आज का दिन थोड़ा खास रहा…
और आज फिर एक चीज महसूस हुई—कि कुछ लोग सच में बहुत अच्छे होते हैं।
उनकी अच्छाई उनकी परवरिश से दिखती है।
उनके व्यवहार में, उनके विचारों में, और जिस तरह वो लोगों को ट्रीट करते हैं।
मेरा दोस्त विशाल भी उन्हीं लोगों में से एक है।
पिछले दो दिनों में उसके घर पर जो स्वागत हमें मिला…
वो सच में बहुत यादगार रहेगा।
छह तारीख की सुबह हमारा ट्रेन था—सुबह साढ़े पाँच बजे।
हम स्टेशन के लिए निकले…
लेकिन थोड़ा लेट हो चुके थे।
जब गेट के बाहर आए…
तो एक भी ऑटो-रिक्शा नहीं मिला।
उस समय लगा कि शायद आज ट्रेन मिस हो जाएगी।
हम पहले तेज चलने लगे…
लेकिन जब टाइम देखा तो समझ आया कि अगर ऐसे ही चलते रहे… तो ट्रेन नहीं मिलेगी।
फिर हमने फैसला किया—
दौड़ना पड़ेगा।
मैं बार-बार घड़ी देख रहा था…
मन में बस यही चल रहा था—
अगर तीन मिनट हैं…
तो कम से कम दो मिनट पूरी ताकत से दौड़ना ही होगा।
और हम दौड़ते रहे…
किसी तरह वो दूरी तय की…
और आखिरकार स्टेशन पहुँच गए।
और सबसे दिलचस्प बात यह थी कि—
हम ट्रेन के आने से पहले पहुँच गए।
और लगभग एक मिनट बाद ट्रेन आ गई।
हम ट्रेन में बैठे…
और उस समय जो राहत मिली… वो शब्दों में बताना मुश्किल है।
कानपुर पहुँचने से पहले हम एक प्लान बना रहे थे।
हम सोच रहे थे कि विशाल को बोलेंगे—
कि हमारी ट्रेन मिस हो गई।
एक छोटा सा सरप्राइज देना चाहते थे।
लेकिन…
निश्चित ने विशाल को मैसेज कर दिया।
और उसने सब बता दिया।
तो हमारा सरप्राइज…
सरप्राइज नहीं रहा।
जब हम पहुँचे…
तो विशाल पहले से ही वहाँ हमारा इंतज़ार कर रहा था।
वह हमें अपने घर ले गया…
हम लोग फ्रेश हुए…
और फिर ब्रेकफास्ट किया।
और सच में…
जो हॉस्पिटैलिटी हमें वहाँ मिली…
वो बहुत ही सराहनीय थी।
जो दो दिन हमने वहाँ बिताए…
वो बहुत ही खूबसूरत याद बन गए।
अब मैं वापस अपने कॉलेज के रूम में हूँ।
और बस यही सोच रहा हूँ—
ज़िंदगी में अच्छे लोग मिलना…
सच में एक ब्लेसिंग है।